Sunday, November 12, 2017

Dronacharya

द्रोण का जन्म पत्ते के दोने से हुआ था। इसीलिए उसका नाम द्रोण हुआ। भारद्वाज ऋषि ने घृतार्ची को गंगास्नान करते देखा, कामवासना से वह स्खलित हो गया। उसने अपना वीर्य एक दोने में रख दिया। दोने से वह वीर्य द्रोण के रूप में निकल आया।

द्रोण ऐसा अवैज्ञानिक चरित्र है जिसकी कोई माँ नहीं थी। सिर्फ पुरुष के गुणसूत्रों से पैदा हुआ पात्र महाजातिवादी चरित्र के रूप में स्थापित है। उसके नाम पर सरकारी पुरस्कार दिया जाना शर्मनाक होने के साथ-साथ उसके अवैज्ञानिक जन्म तथा कुकृत्य को मान्यता देना है।

-Mahendra Yadav
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